BABOSA KATHA



Katha Shri Babosa Bhagwan ki






कथा सुनाऊं भक्तों श्री बाबोसा भगवन की,
जय हो चुरू धाम की जय बोलो।

राजस्थान वीर भूमि में, चुरू शहर है प्यारा।
नाम चमकता, घेवर चंद का, नभ में ज्यों ध्रुवतारा।
जीवन साथी छगनी बाई का परिवार है न्यारा।
माघ सुदी, पंचमी का शुभ दिन, चमका एक  सितारा।
जय हो माँ छगनी की, और जय छगनी के लाल की।
जय हो चुरू धाम की . . .

जन्म हुआ  बाबोसा का तो, घर-घर खुशियां छाई 
गले मिल रहे, नगर निवासी, देते सभी बधाई 
बाला जी अवतार हुआ है, बांटो आज मिठाई 
धन्य हुई है चुरू नगरी, पुण्य दी घडी यह आई 
लेते सभी बलायें, उस बालक के मुस्कान की 
जय हो चुरू धाम की . . .

कुछ वर्षों में ही सबके, दिल पर है राज जमाया 
इतने में ही, भाद्रव शुक्ला पंचम का दिन आया 
स्वर्ग पधारे बाबोसा तो स्वर्ग लोक हर्षाया 
बाबोसा के स्वागत में, देवों ने मंगल गाया 
तीनों लोकों गूंजी, आवाजें मंगल गान की
जय हो चुरू धाम की . .  

मिंगसर शुक्ला पंचम का वह पावन दिन भी आया 
बजरंग ने बाबोसा को अपने पास बिठाया 
सभी रह गये दंग अनोखा चमत्कार दिखलाया 
अपनी शक्ति बाबोसा को, देकर यह फ़रमाया 
तुम्हें ही चिंता करनी, अब भक्तों के कल्याण की 
जय हो चुरू धाम की . . .

तीन पंचमी, शुक्ल पक्ष की, बाबोसा की न्यारी 
पंचम के दिन, दर्शन करने की महिमा है भारी 
पंचम के दिन दर्शन करने आते जो नर-नारी 
उनकी विपदा बाबोसा ने पल भर में है टारी 
सारे भक्तों बोलो, जय पंचम तिथि महान की 
जय हो चुरू धाम की . . .

कष्ट निवारे, जल के छींटे बाबोसा की भभूति 
रक्षा करती, तांती हर पल, बाधा दूर है होती 
चमत्कार दिखलाती हर क्षण, बाबोसा की ज्योति 
जिसने भी, अरदास लग़ाई सफ़ल कामना होती 
जल, भभूति और तांती, बाबोसा का वरदान जी 
जय हो चुरू धाम की . . .

भूत-प्रेत की भाधायें तो, छूमंतर हो जाती 
नाम सुने, जब बाबोसा का, वो नहीं टिकने पाती 
"ॐ बाबोसा "नाम जपे तो घर में खुशियाँ आती 
दुःख में सुख में, हर मौसम में, है ये सच्चा साथी 
बड़ी है महिमा भक्तों, इस "ॐ बाबोसा " नाम की 
जय हो चुरू धाम की . . .

मन में ले विश्वास अगर जो चूरु धाम है जाता  
बाबोसा के मंदिर में, फिर नारियल बांध के आता 
मनोक़ामना होती पूरी पूरी जो मांगे वो पाता 
बाबोसा स, जुड़ जाता है, फिर जन्मों का नाता 
भंडारे खुल जाते, ना फिकर रहे फिर दाम की 
जय हो चुरू धाम की . . .

किन नामों से, तुम्हें पुकारूं नाम तेरे बहुतेरे 
तुम ही ब्रम्हा तुम ही विष्णु तुम ही शंकर मेरे 
सारी दुनिया छोड़ के तेरे, दर पे डाले डेरे 
नाम तुम्हारा, रटते जाऊं, मैं तो साँझ सबेर
देवों ने भी पूजा, क्या बात करें इंसान की 
जय हो चुरू धाम की . . .

गांव गांव और शहर-शहर में, मंदिर बनते जाते 
बाबोसा के दर्शन करने, लाखों भक्त हैं आते,
अपने घर में बाबोसा के मंदिर जो बनवाते 
धन-दौलत के साथ-साथ वो मन की शांति पाते  
घर-घर होड़ लगी है अब मंदिर के निर्माण की
जय हो चुरू धाम की . . . 

आया संकट, भक्तों पर तो, पैदल यात्रा कर दी 
वर्षों से संतान नहीं थी, गोद वो सूनी भर दी
भाग्यहीन के हाथों में किस्मत की चाबी धर दी
नहीं किसी को खाली भेजा, झोली सबकी भर दी
दुर्घटना को टाला और रक्षा कर ली प्राण  की
जय हो चुरू धाम की . . . 

चूरू के मंदिर की भक्तों, महिमा है अति भारी
बजरंगी और बाबोसा की जोड़ी सोहे प्यारी
एक साथ हैं वहां बिराजे दो-दो घोटाधारी
कैसी भी हो शक्ति बाबोसा के आगे हारी
थर-थर वो थर्राता, ना चले किसी शैतान की
जय हो चुरू धाम की . . .

जिस घर में बाबोसा की, तस्वीर लगाई जाती
श्रद्धा और विश्वास से पावन जोत जलाई जाती
सुबह शाम फिर बाबोसा की आरती गाई जाती
सुख, शांति, शुभ-लाभ वहां पर रिद्धि -सिद्धि आती
बाबोसा की महिमा का कितना करूं बखान जी
जय हो चुरू धाम की . . .

विघ्न विनाशक हैं बाबोसा पल-पल मंगलकारी
शरणागत की रक्षा करते बाबोसा बलकारी
भक्तों के घर आ जाते हैं भक्तों के हितकारी
कल्याणी है, अम्रतवाणी बाबोसा उपकारी
नहीं है कोई सीमा, बाबोसा के गुणगान की 
जय हो चुरू धाम की . . . 

बाबोसा ने भक्तों को, एक चमत्कार दिखलाया
मंजु ब़ाईसा में, शक्ति का अहसास कराया
मंजु  ब़ाईस़ा में बाबोसा का वो रूप समाया
जिसे देखने भक्तों का रेले पर रेला आया
जिसने रूप निहारा, वो तो हो गया निहाल जी
जय हो चुरू धाम की . . . 

दुनिया में बाबोसा का गुणगान जहाँ पर होगा
महासाधिका मंजु का भी नाम वहां पर होगा
जहाँ ये दोनों हैं, निश्चित कल्याण वहां पर होगा
सुख, स्मृद्धि, शांति का वरदान वहाँ पर होगा
बाबोसा और मंजु, एक दूजे की पहचान जी
जय हो चुरू धाम की . . . 

देव चमत्कारी बाबोसा चमत्कार दिखलाते
बाबोसा के चमत्कार से, दंग़ सभी रह जाते
आपद विपदा काटे पल में .संकट दूर भगाते
कष्ट मिटाकर, भक्तों के जीवन में खुशियां लाते
बाबोसा के दर पे, तो खुशियां मिले जहान की
जय हो चुरू धाम की . . .

किस्से इतने चमत्कार के क्या-क्या मै बतलाऊं
एक जुबां और लाखों किस्से, कैसे मैं कह पाऊं
भूल न जाऊं कोई किस्सा सोच के ये घबराऊं
इससे तो अच्छा ये होगा, मैं चुप ही रह जाऊं
मुझको आज्ञा दीजै, अब बारी है विश्राम की
जय हो चुरू धाम की . . .

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