Saturday, July 17, 2021

Solah Somvaar Vrat Katha सोलह सोमवार व्रत कथा

                सोलह सोमवार व्रत कथा पूजा विधि : Solah Somvaar Vrat Puja Vidhi



सोमवार व्रत साधारणतया दिन के तीसरे प्रहर  अर्थात संध्या तक होता है | व्रत में यह आवश्यक है की दिन रात में एक बार ही भोजन करें |  सोमवार व्रत में शिवजी और पार्वती जी की पूजा की जाती है |  शिव पारवती जी के पूजन के बाद कथा पढ़नी या सुननी चाहिए | 





Solah Somvaar Vrat Katha : सोलह सोमवार व्रत कथा 
Monday Fasting


एक समय श्री महादेव जी पार्वती जी के साथ भ्रमण करते हुए मृत्युलोक में अमरावती नगरी में आये, वहां के राजा ने एक शिवजी का मंदिर बनवाया था। शंकर जी वहीं ठहर गये। एक दिन पार्वती जी शिवजी से बोली- नाथ! आइये आज चौसर खेलें। खेल प्रारंभ हुआ, उसी समय पुजारी पूजा करने को आये। पार्वती जी ने पूछा- पुजारी जी! बताइये जीत किसकी होगी? वह बाले शंकर जी की और अन्त में जीत पार्वती जी की हुई। पार्वती ने मिथ्या भाषण के कारण पुजारी जी को कोढ़ी होने का शाप दिया, पुजारी जी कोढ़ी हो गये।

कुछ काल बात अप्सराएं पूजन के लिए आई और पुजारी से कोढी होने का कारण पूछा- पुजारी जी ने सब बातें बतला दीं। अप्सराएं बोली- पुजारी जी! तुम सोलह सोमवार का व्रत करो। महादेव जी तुम्हारा कष्ट दूर करेंगे। पुजारी जी ने उत्सुकता से व्रत की विधि पूछी। अप्सरा बोली- सोमवार को व्रत करें, संध्योपासनोपरान्त आधा सेर गेहूं के आटे का चूरमा तथा मिट्‌टी की तीन मूर्ति बनावें और घी, गुड , दीप, नैवेद्य, बेलपत्रादि से पूजन करें। बाद में चूरमा भगवान शंकर को अर्पण कर, प्रसादी समझ वितरित कर प्रसाद लें। इस विधि से सोलह सोमवार कर सत्रहवें सोमवार को पांच सेर गेहूं के आटे की बाटी का चूरमा बनाकर भोग लगाकर बांट दें फिर सकुटुम्ब प्रसाद ग्रहण करें। ऐसा करने से शिवजी तुम्हारे मनोरथ पूर्ण करेंगे। यह कहकर अप्सरा स्वर्ग को चली गई।

पुजारी जी यथाविधि व्रत कर रोग मुक्त हुए और पूजन करने लगे। कुछ दिन बाद शिव पार्वती पुनः आये पुजारी जी को कुशल पूर्वक देख पार्वती ने रोग मुक्त होने का कारण पूछा। पुजारी के कथनानुसार पार्वती ने व्रत किया, फलस्वरूप अप्रसन्न कार्तिकेय जी माता के आज्ञाकारी हुए। कार्तिकेय जी ने भी पार्वती से पूछा कि क्या कारण है कि मेरा मन आपके चरणों में लगा? पार्वती ने वही व्रत बतलाया। कार्तिकेय जी ने भी व्रत किया, फलस्वरूप बिछुड़ा हुआ मित्र मिला। उसने भी कारण पूछा। बताने पर विवाह की इच्छा से यथाविधि व्रत किया। फलतः वह विदेश गया, वहां राजा की कन्या का स्वयंवर था। राजा का प्रण था कि हथिनी जिसको माला पहनायेगी उसी के साथ पुत्री का विवाह होगा। यह ब्राह्‌मण भी स्वयंवर देखने की इच्छा से एक ओर जा बैठा। हथिनी ने माला इसी ब्राह्‌मण कुमार को पहनाई। धूमधाम से विवाह हुआ तत्पश्चात दोनों सुख से रहने लगे। एक दिन राजकन्या ने पूछा- नाथ! आपने कौन सा पुण्य किया जिससे राजकुमारों को छोड हथिनी ने आपका वरण किया। ब्राह्‌मण ने सोलह सोमवार का व्रत सविधि बताया। राज-कन्या ने सत्पुत्र प्राप्ति के लिए व्रत किया और सर्वगुण सम्पन्न पुत्र प्राप्त किया। बड़े होने पर पुत्र ने पूछा- माता जी! किस पुण्य से मेरी प्राप्ति आपको हुई? राजकन्या ने सविधि सोलह सोमवार व्रत बतलाया। पुत्र राज्य की कामना से व्रत करने लगा। उसी समय राजा के दूतों ने आकर उसे राज्य-कन्या के लिए वरण किया। आनन्द से विवाह सम्पन्न हुआ और राजा के दिवंगत होने पर ब्राह्‌मण कुमार को गद्‌दी मिली। फिर वह इस व्रत को करता रहा। एक दिन इसने अपनी पत्नी से पूजन सामग्री शिवालय में ले चलने को कहा, परन्तु उसने दासियों द्वारा भिजवा दी। जब राजा ने पूजन समाप्त किया जो आकाशवाणी हुई कि इस पत्नी को निकाल दे, नहीं तो वह तेरा सत्यानाश कर देगी। प्रभु की आज्ञा मान उसने रानी को निकाल दिया।



                                                                            


रानी भाग्य को कोसती हुई नगर में बुढ़िया के पास गई। दीन देखकर बुढिया ने इसके सिर पर सूत की पोटली रख बाजार भेजा, रास्ते में आंधी आई, पोटली उड गई। बुढिया ने फटकार कर भगा दिया। वहां से तेली के यहां पहुंची तो सब बर्तन चटक गये, उसने भी निकाल दिया। पानी पीने नदी पर पहुंची तो नदी सूख गई। सरोवर पहुंची तो हाथ का स्पर्श होते ही जल में कीड़े पड गये, उसी जल को पी कर आराम करने के लिए जिस पेड के नीचे जाती वह सूख जाता। वन और सरोवर की यह दशा देखकर ग्वाल इसे मन्दिर के गुसाई के पास ले गये। यह देखकर गुसाईं जी समझ गये यह कुलीन अबला आपत्ति की मारी हुई है। धैर्य बंधाते हुए बोले- बेटी! तू मेरे यहां रह, किसी बात की चिन्ता मत कर। रानी आश्रम में रहने लगी, परन्तु जिस वस्तु पर इसका हाथ लगे उसी में कीड़े पड जायें। दुःखी हो गुसाईं जी ने पूछा- बेटी! किस देव के अपराध से तेरी यह दशा हुई? रानी ने बताया – मैंने पति आज्ञा का उल्लंघन किया और महादेव जी के पूजन को नहीं गई। गुसाईं जी ने शिवजी से प्रार्थना की। गुसाईं जी बोले- बेटी! तुम सोलह सोमवार का व्रत करो। रानी ने सविधि व्रत पूर्ण किया। व्रत के प्रभाव से राजा को रानी की याद आई और दूतों को उसकी खोज करने भेजा। आश्रम में रानी को देखकर दूतों ने आकर राजा को रानी का पता बताया, राजा ने जाकर गुसाईं जी से कहा- महाराज! यह मेरी पत्नी है शिव जी के रुष्ट होने से मैंने इसका परित्याग किया था। अब शिवजी की कृपा से इसे लेने आया हूं। कृपया इसे जाने की आज्ञा दें। गुसाईं जी ने आज्ञा दे दी। राजा रानी नगर में आये। नगर वासियों ने नगर सजाया, बाजा बजने लगे। मंगलोच्चार हुआ। शिवजी की कृपा से प्रतिवर्ष सोलह सोमवार व्रत को कर रानी के साथ आनन्द से रहने लगा। अंत में शिवलोक को प्राप्त हुए। इसी प्रकार जो मनुष्य भक्ति सहित और विधिपूर्वक सोलह सोमवार व्रत को करता है और कथा सुनता है उसकी सब मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं और अंत में शिवलोक को प्राप्त होता है।












सोमवार व्रत की आरती : 

जय शिव ओंकारा जय शिव ओंकारा |
ब्रह्मा, विष्णु, सदाशिव अर्दाडी धारा || टेक
एकानन, चतुरानन, पंचानन राजे |
हंसानन गरुडासन बर्षवाहन साजै || जय
दो भुज चार चतुर्भुज दसभुज अते सोहै |
तीनो रूप निरखता त्रिभुवन जन मोहै || जय
अक्षयमाला वन माला मुंड माला धारी |
त्रिपुरारी कंसारी वर माला धारो || जय
श्वेताम्बर पीताम्बर बाघम्बर अंगे |
सनकादिक ब्रह्मादिक भूतादिक संगे || जय
कर मे श्रेष्ठ कमंडलु चक्र त्रिशूल धर्ता |
जग - कर्ता जग - हर्ता जग पालन कर्ता || जय
ब्रह्मा विष्णु सदा शिव जानत अविवेका |
प्रणवाक्षर के मध्य ये तीनो एका || जय
त्रिगुण शिवजी की आरती जो कोई गावे |
कहत शिवानन्द स्वामी सुख सम्पति पावे || जय

Friday, July 16, 2021

Babosa Bhajan Sandhya on babosa Panchami

                                    एक बार फिर पावन पंचमी की शाम,बाबोसा भगवान के नाम










परम आराधिका मंजू बाईसा के सान्निध्य में आगामी पंचमी यानि 15 जुलाई को एक बार फिर आनंद लीजिये श्री बाबोसा भगवान के नए मधुर भजनों का।

कार्यक्रम में प्रस्तुति सहयोग का सौभाग्य प्राप्त हुआ है श्री बाबोसा भक्त मंडल, आंध्रप्रदेश, तेलंगाना को।
आप से निवेदन है कि इस भजनसंध्या से अवश्य जुड़ें एवं श्री बाबोसा भगवान की कृपा के पात्र बनें।
जय श्री बाबोसा🙏






Wednesday, July 7, 2021

New Babosa Mandir Inauguration - Sirsa - Haryana

                                                                       भव्य मंदिर लोकार्पण

परम आराधिका मंजू बाईसा ने अपने पावन कर-कमलों से 24 जून को ब्लैक डायमंड केमिकल, सिरसा(हरियाणा) के परिसर में एक भव्य मंदिर का लोकार्पण किया।

                                                                


मंदिर में श्री बाबोसा भगवान के संग श्री हनुमान जी एवं साँई नाथ महाराज की मूर्तियां भी प्रतिष्ठापित की गईं।
कोरोना प्रोटोकॉल के मद्देनजर सीमित संख्या में ही भक्तों को आमंत्रित किया गया था। श्री अजय बैद,अरुण सुराणा, दीपक दुगड़, भरत छाजेड़ ने मधुर भजनों की प्रस्तुति दी।

                                                                        


परम श्रद्धेय प्रकाश भाई जी ने सभी भक्तों को परिवार में प्रेम और शांति के साथ रहने की प्रेरणा दी।
इस अवसर पर फैक्ट्री के संचालक श्री अरुण जैन,सुरेंद्र डागा एवं गौतम बांठिया ने अपने पारिवारिक जनों के साथ बाईसा एवं भाईजी का भावपूर्ण स्वागत किया।
            



                                                                    



Sunday, November 18, 2018

New Bhajan - Mujhe Raas Aa Gaya


मुझे रास आ गया है,
तेरे दर पे सर झुकाना

मुझे रास आ गया है, तेरे दर पे सर झुकाना,
तुझे मिल गया पुजारी, मुझे मिल गया ठिकाना


मुझे कौन जानता था, तेरी बंदगी से पहले,
तेरी याद ने बनादी, मेरी ज़िन्दगी फ़साना 



मुझे इस का ग़म नहीं है , के बदल गया ज़माना
मेरी ज़िन्दगी के मालिक, कहीं तुम बदल ना जाना 



तेरी सांवली सी सूरत, मेरे मन में बस गयी है 
ए संवारे सलोने, अब और ना सताना



मेरी आरज़ू यही है , दम निकले तेरे दर पे,
अभी सांस चल रही है , अभी तुम चले ना जाना






Mujhe Raas Aa Gaya Hai,
Tere Dar Pe Sar Jhukana

Mujhe Raas Aa Gaya Hai, Tere Dar Pe Sar Jhukaana,
Tujhe Mil Gaya Pujaaree, Mujhe Mil Gaya Thikaana


Mujhe Kaun Jaanata Tha, Teree Bandagee Se Pahale,
Teree Yaad Ne Banaadee, Meree Zindagee Fasaana 



Mujhe Is Ka Gam Nahin Hai , Ke Badal Gaya Zamaana
Meree Zindagee Ke Maalik, Kaheen Tum Badal Na Jaana 



Teree Saanvalee See Soorat, Mere Man Mein Bas Gayee Hai 
E Sanvaare Salone, Ab Aur Na Sataana



Meree Aarazoo Yahee Hai , Dam Nikale Tere Dar Pe,
Abhee Saans Chal Rahee Hai , Abhee Tum Chale Na Jaana

Saturday, October 6, 2018

Beautiful Babosa Bhajan - Main Phir Bhi Tumko

BHAJAN :- Main Phir Bhi Tujhko Chahunga


तुम मेरे हो, इस पल मेरे हो
कल शायद ये आलम ना रहे
कुछ ऐसा हो तुम, तुम ना रहो
कुछ ऐसा हो हम, हम ना रहें
ये रास्ते अलग हो जाएँ
चलते-चलते हम खो जाएँ
मैं फिर भी तुमको चाहूँगा
मैं फिर भी तुमको चाहूँगा
मैं फिर भी तुमको चाहूँगा
मैं फिर भी तुमको चाहूँगा
इस चाहत में मर जाऊँगा
मैं फिर भी तुमको चाहूँगा
मेरी जान, मैं हर ख़ामोशी में

          तेरे प्यार के नगमें गाऊँगा 






 

मैं फिर भी तुमको चाहूँगा
मैं फिर भी तुमको चाहूँगा
इस चाहत में मर जाऊँगा
मैं फिर भी तुमको चाहूँगा
ऐसे ज़रूरी हो मुझको तुम
जैसे हवाएँ साँसों को
ऐसे तलाशूँ मैं तुमको
जैसे के पैर ज़मीनों को
हँसना या रोना हो मुझे
पागल सा ढूँढू मैं तुम्हें
कल मुझसे मुहब्बत हो-ना-हो
कल मुझको इजाज़त हो-ना-हो
टूटे दिल के टुकड़े लेकर
तेरे दर पे ही रह जाऊँगा
मैं फिर भी तुमको चाहूँगा
मैं फिर भी तुमको चाहूँगा
इस चाहत में मर जाऊँगा
मैं फिर भी तुमको चाहूँगा
तुम यूँ मिले हो जब से मुझे
और सुनहरी मैं लगती हूँ
सिर्फ़ लबों से नहीं, अब तो
पूरे बदन से हँसती हूँ
मेरे दिन-रात सलोने से
सब हैं तेरे ही होने से
ये साथ हमेशा होगा नहीं
तुम और कहीं, मैं और कहीं
लेकिन जब याद करोगे तुम
मैं बनके हवा आ जाऊँगा
मैं फिर भी तुमको चाहूँगा
मैं फिर भी तुमको चाहूँगा
इस चाहत में मर जाऊँगा
मैं फिर भी तुमको चाहूँगा
मैं फिर भी तुमको चाहूँगा
मैं फिर भी तुमको चाहूँगा
मैं फिर भी तुमको चाहूँगा
मैं फिर भी तुमको चाहूँगा

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